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मान अपमान को छोड़ना होगा
हमारे परम-चरम लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति के लिए अनंत जन्मों से प्रयत्नशील रहने पर भी हम लक्ष्य से वंचित रहे क्योंकि प्रयत्न के साथ जिन चीजों का त्याग करना था वो हमने नहीं किया। जिस मान-अपमान की बीमारी को छोड़ना था उसे मन से छोड़ न सके , उसी झगड़े में सदा उलझे रहे ।
Read Moreसबसे बड़ा मूर्ख कौन है ?
कितनी विचित्र बात है ! कि इस संसार में हर व्यक्ति सदा स्वयं को सबसे समझदार और दूसरे को मूर्ख मानता है और यही सिद्ध करने के लिए प्रयत्नशील भी रहता है जबकि वास्तविकता ये है कि हम सभी मूर्ख हैं। प्रत्येक मायाबद्ध मनुष्य जो स्वयं को देह मानता है, शरीर को ही 'मैं' मानता है वो ही सबसे बड़ा मूर्ख है और ऐसे हम सभी हैं।
Read Moreभक्ति में अनन्यता परमावश्यक है
हम सभी अनंतानंत जन्मों से भक्ति करते आए हैं क्योंकि जीव अनादि है इसलिए अनंत बार मानव देह मिला, सद्गुरु मिले, हमने भक्ति भी की लेकिन अनन्यता न होने के कारण हमारी भक्ति कभी परिपक्व नहीं हो पाई, पूर्ण नहीं हो पाई और इसी गड़बड़ी के कारण हम आज भी अपने परम चरम लक्ष्य से वंचित हैं।
Read Moreजगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रचारिका सुश्री श्रीधरी दीदी द्वारा भक्ति संदेश!
सारा विश्व दान करो गोविंद राधे। तो भी गुरु ऋण ते ना उऋण करा दे ।। ( राधा गोविंद गीत )
सद्गुरु कृपाकांक्षी भक्तवृन्द ! जय श्री राधे !
इस अगाध भवसिंधु में डूबते हुए, अकुलाते हुए जीवों के लिए सद्गुरु ही एकमात्र आश्रय हैं ।





